उर्दू साहित्य के प्रथम श्रेणी के कवि कलीम आजिज़ का ग़ज़ल संग्रह
दिल से जो
बात निकली ग़ज़ल हो गयी
पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है ।
बिछड़
कर फिर जो मैख़ाने गये हम
बड़ी मुश्किल से पहचाने गये हम
बड़ी मुश्किल से पहचाने गये हम
लगा
कर लाये कोई ज़ख़्म ताज़ा
जहाँ इस दिल को बहलाने गये हम
जहाँ इस दिल को बहलाने गये हम
परेशॉ
हाल होकर ख़ुद ही आये
जब उन ज़ुल्फों को सुलझाने गये हम
जब उन ज़ुल्फों को सुलझाने गये हम
मनाकर
लाये थे दिल को जहाँ से
वहीं तंग आके पहुँचाए गये हम
वहीं तंग आके पहुँचाए गये हम
तू
ख़ुद थी ख़ाना बरबाद ऐ मुहब्बत
तिरे घर क्यों खु़दा जाने गये हम
तिरे घर क्यों खु़दा जाने गये हम
तु
ऐ दिल आ गया तेरा गया क्या
तिरे चलते ऐ दीवाने गये हम
तिरे चलते ऐ दीवाने गये हम
न
आया होश 'आजिज़' को न आया
कई बार उसको समझाने गये हम
कई बार उसको समझाने गये हम
कलीम आजिज़ का असली नाम कलीम अहमद है और क़लमी नाम कलीम आजिज़ है। इनका जन्म 11 अक्तूबर 1924, तेलहाड़ा (जिला पटना) में हुआ। पटना विश्वविद्यालय में पठन-पाठन के बाद 1964-65 में पटना कालेज में लेक्चरर हुए और 1986 में सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान समय में बिहार सरकार, उर्दू मुशावरती कमिटी के अध्यक्ष हैं। कलीम आजिज़ की उपाधियाँ है-पद्म श्री 1989, भारत सरकार; इम्तियाज़े मीर, कुल हिंद मीर अकादमी,लखनऊ; अल्लामा, मशीगन उर्दू सोसाइटी, अमेरिका; अल्लामा, तिलसा लिटरेरी सोसाइटी, अमेरिका; प्रशंसा पत्र, मल्टी कल्चरल कौंसिल आफ ग्रेटर टोरंटो; प्रशंसा पत्र, उर्दू कौंसिल आफ कनाडा; मौलाना मज़हरुल हक़ पुरस्कार, राज्य भाषा, बिहार सरकार; बिहार उर्दू अकादमी पुरस्कार।
कलीम आजिज़ की प्रकाशित रचनाएँ है - मजलिसे अदब (आलोचना); वो जो शाइरी का सबब हुआ, जब फसले बहाराँ आई थी(ग़ज़ल संग्रह); फिर ऐसा नज़ारा नहीं होगा, कूचा-ए जानाँ जानाँ (ग़ज़लों एवं नज़्मों का संग्रह); जहाँ ख़ुशबू ही ख़ुशबू थी, अभी सुन लो मुझसे (आत्मकथा); मेरी ज़बान मेरा क़लम (लेखों का संग्रह, दो भाग); दफ़्तरे गुम गश्ता (शोध); दीवाने दो, पहलू न दुखेगा (पत्रों का संग्रह); एक देश एक बिदेसी (यात्रा-वृत्तान्त, अमेरिका); यहाँ से काबा-काबा से मदीना (यात्रा-वृत्तान्त, हज)।
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