Monday, 4 July 2016

उर्दू साहित्य के प्रथम श्रेणी के कवि कलीम आजिज़ का ग़ज़ल संग्रह 

 दिल से जो बात निकली ग़ज़ल हो गयी 

पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है । 



बिछड़ कर फिर जो मैख़ाने गये हम
बड़ी मुश्किल से पहचाने गये हम

लगा कर लाये कोई ज़ख़्म ताज़ा
जहाँ इस दिल को बहलाने गये हम

परेशॉ हाल होकर ख़ुद ही आये
जब उन ज़ुल्फों को सुलझाने गये हम

मनाकर लाये थे दिल को जहाँ से
वहीं तंग आके पहुँचाए गये हम

तू ख़ुद थी ख़ाना बरबाद ऐ मुहब्बत
तिरे घर क्यों खु़दा जाने गये हम

तु ऐ दिल आ गया तेरा गया क्या
तिरे चलते ऐ दीवाने गये हम

न आया होश 'आजिज़' को न आया
कई बार उसको समझाने गये हम



कलीम आजिज़ का असली नाम कलीम अहमद है और क़लमी नाम कलीम आजिज़ है। इनका जन्म 11 अक्तूबर 1924, तेलहाड़ा (जिला पटना) में हुआ। पटना विश्वविद्यालय में पठन-पाठन के बाद 1964-65 में पटना कालेज में लेक्चरर हुए और 1986 में सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान समय में बिहार सरकारउर्दू मुशावरती कमिटी के अध्यक्ष हैं। कलीम आजिज़ की उपाधियाँ है-पद्म श्री 1989, भारत सरकारइम्तियाज़े मीरकुल हिंद मीर अकादमी,लखनऊअल्लामामशीगन उर्दू सोसाइटीअमेरिकाअल्लामातिलसा लिटरेरी सोसाइटीअमेरिकाप्रशंसा पत्रमल्टी कल्चरल कौंसिल आफ ग्रेटर टोरंटोप्रशंसा पत्रउर्दू कौंसिल आफ कनाडामौलाना मज़हरुल हक़ पुरस्कारराज्य भाषाबिहार सरकारबिहार उर्दू अकादमी पुरस्कार।  
कलीम आजिज़ की प्रकाशित रचनाएँ है - मजलिसे अदब (आलोचना)वो जो शाइरी का सबब हुआजब फसले बहाराँ आई थी(ग़ज़ल संग्रह)फिर ऐसा नज़ारा नहीं होगाकूचा-ए जानाँ जानाँ (ग़ज़लों एवं नज़्मों का संग्रह)जहाँ ख़ुशबू ही ख़ुशबू थीअभी सुन लो मुझसे (आत्मकथा)मेरी ज़बान मेरा क़लम (लेखों का संग्रहदो भाग)दफ़्तरे गुम गश्ता (शोध)दीवाने दोपहलू न दुखेगा (पत्रों का संग्रह)एक देश एक बिदेसी (यात्रा-वृत्तान्तअमेरिका)यहाँ से काबा-काबा से मदीना (यात्रा-वृत्तान्तहज)।

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